ग्वालियर27जून2026। कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। यदि पुलिस किसी के खिलाफ कार्रवाई करती है तो वह केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत फिजिकल अरेस्ट ही करती है। यह बात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुजावल जग्गा ने गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित सेफ क्लिक 2.0 साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के दौरान कही। जीआरएमसी के तृतीय तल स्थित स्मार्ट क्लास रूम में शनिवार दोपहर 12 बजे से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने एएसपी सुजावल जग्गा का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया।
डिजिटल ठगी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचने की सलाह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एएसपी जग्गा ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, साइबर बुलिंग, डेटा चोरी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और तथाकथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस कभी भी व्हाट्सएप कॉल, वीडियो कॉल या मोबाइल फोन पर पूछताछ कर किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। उन्होंने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने, अज्ञात व्यक्तियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करने, ओटीपी, बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और अन्य निजी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करे, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

चिकित्सा शिक्षकों और विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा शिक्षक और विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका एएसपी जग्गा ने सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के साथ उत्तर दिया। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षक, रेजिडेंट डॉक्टर और बड़ी संख्या में एमबीबीएस विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन पर गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर डॉ. धाकड़ ने कहा कि वर्तमान समय में जिस तरह से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगा जा रहा है, उसे देखते हुए यह अभियान निश्चित रूप से चिकित्सा जगत और समाज को इस अदृश्य खतरे से सुरक्षित रखने में बेहद मददगार साबित होगा।





