ट्रक छुड़ाने और जुर्माना कम करने के नाम पर मांग रहा था 2 लाख की घूस, लोकायुक्त टीम ने 78000 लेते रंगे हाथों पकड़ा, कार्यवाही से बचने प्रकरण दर्ज कर जावक कर दबा रखी थी फाइल

रीवा 26 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश के लोकायुक्त संगठन द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियानों के बीच रीवा लोकायुक्त ने एक बेहद शातिर और चौंकाने वाले मामले का खुलासा किया है। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा के कुशल नेतृत्व और सटीक निर्देशन में टीम ने एक ऐसे भ्रष्ट वनपाल को रंगे हाथों दबोचा है, जिसने अपनी खाल बचाने के लिए कानून के साथ खिलवाड़ करने की हदें पार कर दी थीं। एसपी योगेश्वर शर्मा की अगुवाई में की गई इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि अपराधियों के कितने भी शातिर तरीके क्यों न हों, कानून की लंबी पहुंच से वे बच नहीं सकते।

खुद ही केस दर्ज कर तैयार की थी बचाव की पटकथा

​शिकायतकर्ता नीरज यादव (निवासी सीतापुर, उत्तर प्रदेश) एक ट्रक (UP 15 DT 0614) का चालक है। 7 जून 2026 को लकड़ी लोड कर मुरादाबाद जा रहे उसके ट्रक को त्योंथर वन चौकी (सिरमौर परिक्षेत्र) के कर्मचारियों ने पकड़ लिया था।

​जब चालक ने वाहन को छुड़ाने के लिए कार्यवाहक वनपाल दिनेश कुमार (पदस्थ सिरमौर परिक्षेत्र) से संपर्क किया, तो उसने ट्रक छोड़ने और जुर्माना कम करने के एवज में 2 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांग ली।

साजिश का सनसनीखेज पहलू:

इस मामले की सबसे खास बात यह थी कि आरोपी वनपाल दिनेश कुमार ने खुद को बचाने के लिए एक खतरनाक साजिश रची थी। उसने घूस की डील करने के साथ-साथ चुपचाप ट्रक के खिलाफ एक प्रकरण दर्ज कर लिया और उसे कार्यालय के जावक रजिस्टर में भी चढ़ा दिया। उसकी सोची-समझी चाल यह थी कि यदि भविष्य में कोई जांच या कार्रवाई की आंच उस पर आए, तो वह यह दावा कर सके कि उसने तो पहले ही मामला दर्ज कर आगे बढ़ा दिया था और उसे झूठा फंसाया जा रहा है। उसने अपने बचाव के लिए तमाम दस्तावेज और फाइलें तैयार कर ली थीं।

एसपी योगेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में बिछाया गया जाल

​जब पीड़ित चालक ने दिनांक 10 जुलाई 2026 को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा के समक्ष अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई, तो एसपी शर्मा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत गोपनीय सत्यापन के निर्देश दिए। शिकायत सही पाए जाने पर उनके मार्गदर्शन में एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया।

​महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख के सख्त निर्देशों और डीएसपी मनोज सिंह के सह-निर्देशों पर रीवा लोकायुक्त टीम ने 25 जुलाई 2026 को रीवा-सेमरिया रोड स्थित पूर्वा फॉल के पास ‘स्वर्णलोक ढाबे’ पर दबिश दी। जैसे ही आरोपी दिनेश कुमार ने शिकायतकर्ता से पहली किस्त के रूप में 78,000 रुपये की रिश्वत ली, ट्रेपकर्ता अधिकारी निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया और डीएसपी प्रवीण सिंह परिहार के नेतृत्व में टीम ने उसे दबोच लिया।

लोकायुक्त ने जब्त किए जावक रजिस्टर और फर्जी दस्तावेज

​कार्रवाई के दौरान जब लोकायुक्त टीम ने कार्यालय के रिकॉर्ड की पड़ताल की, तो आरोपी की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई। टीम ने वे तमाम फाइलें और दस्तावेज भी जप्त कर लिए, जिन्हें आरोपी ने सिर्फ जावक पर चढ़ाया था लेकिन आगे नहीं भेजा था—यही दस्तावेज उसके भ्रष्टाचार और झूठी पटकथा का सबसे बड़ा पर्दाफाश बन गए।

​आरोपी कार्यवाहक वनपाल दिनेश कुमार के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधन 2018 की धारा 7) के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। लोकायुक्त एसपी योगेश्वर शर्मा के नेतृत्व में हुई इस सख्त कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। लोकायुक्त संगठन ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई भी शासकीय कर्मचारी रिश्वत की मांग करे, तो वे लोकायुक्त रीवा के हेल्पलाइन नंबर 98936 07619 पर संपर्क कर सकते हैं।

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