भोपाल/भिंड7अगस्त2026: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने भिंड और दतिया जिलों में सिंध नदी के प्रवाह क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध व मशीनीकृत रेत उत्खनन पर कड़ा संज्ञान लिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह जी द्वारा दायर मूल आवेदन (O.A. No. 161/2026) पर सुनवाई करते हुए NGT के न्यायिक सदस्य माननीय न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य माननीय सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 3-सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया है।
याचिका के मुख्य बिंदु:
याचिकाकर्ता डॉ. गोविंद सिंह जी की ओर से अधिवक्ता पुलकित गोधा एवं अधिवक्ता महिमा सिंह ने ट्रिब्यूनल के समक्ष तर्क प्रस्तुत करते हुए बताया कि भिंड जिले के 18 गांवों और दतिया जिले के 6 गांवों में सिंध नदी के भीतर भारी अर्थ-मूविंग मशीनों और सक्शन-ड्रेजिंग नौकाओं का उपयोग कर अवैध रेत निकाली जा रही है। बिना मान्य पर्यावरण स्वीकृति (EC) और जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (DSR) के निकाली गई इस रेत को बिना वैध ट्रान्जिट परमिट के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सप्लाई किया जा रहा है।
याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया कि सिंध नदी राष्ट्रीय चंबल (घड़ियाल) वन्यजीव अभयारण्य का ही पारिस्थितिक हिस्सा है, जो मगरमच्छों, घड़ियालों, इंडियन फ्लैपशेल कछुओं तथा दुर्लभ प्रवासी पक्षियों का प्रजनन स्थल है। भारी मशीनों से हो रहे अवैध उत्खनन से नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह और जलीय जीवों के अस्तित्व पर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
NGT द्वारा जारी मुख्य निर्देश:
संयुक्त जांच समिति का गठन: ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), पर्यावरण विभाग (मध्य प्रदेश) और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक 3-सदस्यीय समिति का गठन किया है। MP Pollution Control Board को इसमें नोडल एजेंसी बनाया गया है।
स्थल निरीक्षण एवं रिपोर्ट: समिति को प्रभावित स्थलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर 6 सप्ताह के भीतर फैक्चुअल एवं एक्शन टेकन रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
नोटिस जारी: ट्रिब्यूनल ने मध्य प्रदेश शासन सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को की जाएगी
सिंध नदी में अवैध रेत उत्खनन पर NGT सख्त: डॉ. गोविंद सिंह की याचिका पर 3-सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित, 6 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट





