ग्वालियर22मई2026।कायस्थ समाज ने अपनी घटती आबादी और समाज में सिमटते जा रहे परिवारों को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राष्ट्रीय कायस्थ एकता मंच की बैठक में यह तय किया गया है कि समाज के जो भी दंपत्ति तीसरी संतान को जन्म देंगे, उन्हें समाज की ओर से 21,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि सम्मान स्वरूप प्रदान की जाएगी। यह पहल समाज की जनसंख्या में आ रही गिरावट को रोकने और भावी पीढ़ी को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
घटती आबादी और लुप्त होते रिश्तों पर जताई गहरी चिंता
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष नूतन श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदुओं की आबादी लगातार कम होती जा रही है, जो भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले ‘हम दो हमारे दो’ का चलन था, लेकिन अब लोग ‘हम दो हमारे एक’ तक सीमित हो गए हैं और कई दंपत्ति संतान पैदा ही नहीं करना चाहते। नूतन श्रीवास्तव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि संतानें नहीं होंगी तो बुआ, मौसी, मामा, चाचा और दादा-दादी जैसे पवित्र रिश्ते पूरी तरह खत्म हो जाएंगे, क्योंकि रिश्तों की डोर बच्चों से ही जुड़ी होती है।
कमजोर परिवारों की पढ़ाई से लेकर नौकरी तक की जिम्मेदारी
मंच ने केवल प्रोत्साहन राशि देने का ही निर्णय नहीं लिया है, बल्कि समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के लिए भी विशेष प्रावधान किए हैं। बैठक में घोषणा की गई कि यदि कोई दंपत्ति गरीब है, तो उसकी तीसरी संतान के पालन-पोषण, उच्च शिक्षा, शादी और यहाँ तक कि उसे रोजगार दिलाने की पूरी जिम्मेदारी भी समाज के सक्षम लोग और संगठन मिलकर उठाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी परिवार संतान सुख से वंचित न रहे।
बैठक में समाज के गणमान्य नागरिकों की रही मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण निर्णय के दौरान राष्ट्रीय कायस्थ एकता मंच की कार्यकारिणी के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में मुख्य रूप से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सक्सेना, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ उदय श्रीवास्तव, अरविंद खरे, अशोक सक्सेना, महेश सक्सेना, डॉ राजीव श्रीवास्तव और पंकज श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे। इनके अलावा विजय श्रीवास्तव, रवि श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव, कुशाग्र श्रीवास्तव, आदित्य सक्सेना और राहुल सक्सेना सहित समाज के कई अन्य प्रमुख लोग इस अनूठी पहल का समर्थन करने के लिए मौजूद थे।





