ग्वालियर31.07.2026 स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू और चिकुनगुनिया से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. एम.एस. सागर ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सामान्य बुखार भी मलेरिया या डेंगू हो सकता है।
7 से 12 दिन में पनपता है डेंगू का मच्छर
सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर ने बताया कि डेंगू और चिकुनगुनिया एडीज मच्छर के काटने से फैलते हैं। यह मच्छर सामान्यतः दिन में काटता है और हमारे घर या आसपास रुके हुए साफ पानी में ही पनपता है। खुली टंकियों, गमलों, कूलर, मटकों, मनी प्लांट के पॉट, टायरों और कबाड़ में जमा पानी में मच्छर अंडे देते हैं। मात्र 7 से 12 दिनों के भीतर साफ पानी में इनका उत्पत्ति चक्र पूरा हो जाता है। इसलिए सप्ताह में एक बार पानी के ऐसे सभी पात्रों को खाली कर साफ करना बेहद जरूरी है।
लक्षण दिखने पर न लें खुद से पेनकिलर
डेंगू के प्रारंभिक लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और हाथ-पैरों में दर्द शामिल हैं। गंभीर स्थिति में शरीर पर लाल चकत्ते, नाक व मसूड़ों से खून आना या उल्टी होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि डेंगू के लक्षण दिखने पर मरीज खुद से दर्द निवारक (पेनकिलर) दवाओं का सेवन न करें, इससे स्थिति बिगड़ सकती है। केवल चिकित्सक की सलाह पर या उम्र के अनुसार पैरासिटामोल ली जा सकती है। इसके अलावा किसी अप्रशिक्षित या झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराने के बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
मुफ्त जांच सुविधा और बचाव के उपाय
जिले में डेंगू और चिकुनगुनिया की जांच जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज ग्वालियर में पूरी तरह से निःशुल्क उपलब्ध है। पुष्टि होने पर मरीज को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ जैसे नारियल पानी, दाल का पानी, फलों का रस और ओआरएस (ORS) घोल लेने की सलाह दी गई है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनोद दौनेरिया के अनुसार, मच्छरों से बचाव के लिए पूरे बांह के कपड़े पहनें, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और कबाड़ या पानी के बर्तनों में समय-समय पर पानी बदलते रहें। जिन जलपात्रों का पानी नहीं बदला जा सकता, उनमें मिट्टी का तेल या जला हुआ इंजन ऑयल डालने से मच्छर के लार्वा नष्ट हो जाते हैं।





