ग्वालियर, 3 नवंबर 2026। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरकेएस धाकड़ ने मंगलवार को एक हजार बिस्तर अस्पताल में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों के इंस्टॉलेशन कार्य का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इंजीनियर्स से मशीनें शुरू होने की दो टूक समय-सीमा पूछी। इंजीनियर्स ने बताया कि एमआरआई मशीन में फिलहाल सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन का काम चल रहा है, जिसे तीन से चार दिन में पूरा कर लिया जाएगा। वहीं, सीटी स्कैन मशीन के लिए बिजली सप्लाई का कनेक्शन भी हो चुका है और इसे भी तीन से चार दिन में शुरू करने की तैयारी है। इस पर अधिष्ठाता ने इंजीनियर्स को सख्त निर्देश दिए कि बार-बार समय-सीमा बढ़ाने के बजाय जल्द से जल्द काम पूरा किया जाए। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी कि यदि आगामी 16 नवंबर तक इंस्टॉलेशन का काम पूरी तरह पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित इंजीनियर्स सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
निरीक्षण के दौरान रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अमित जैन को मशीनों के रखरखाव के कड़े निर्देश देते हुए अधिष्ठाता ने कहा कि प्राइवेट सेंटरों की मशीनें सालों तक सुरक्षित और दुरुस्त रहती हैं, उसी तर्ज पर इन शासकीय मशीनों की भी बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जाए। डॉ. जैन ने एमआरआई और सीटी स्कैन के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त तकनीशियन की आवश्यकता बताई। इस पर अधिष्ठाता ने तुरंत डिमांड भेजने को कहा और अस्पताल में आवश्यक स्टाफ जल्द उपलब्ध कराने का पूरा आश्वासन दिया।
ब्रेकी थेरेपी का इंस्टॉलेशन पूरा, रेडिएशन सोर्स का इंतजार
एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों का जायजा लेने के बाद अधिष्ठाता सीधे कैंसर विभाग पहुंचे। यहां उन्होंने ब्रेकी थेरेपी मशीन के इंस्टॉलेशन कार्य की प्रगति की जानकारी ली। इंजीनियर्स ने बताया कि मशीन का इंस्टॉलेशन पूरा हो चुका है और अब केवल रेडिएशन सोर्स आने का इंतजार है। इसके उपलब्ध होते ही मशीन को तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद अधिष्ठाता ने लीनियर एक्सीलेटर के इंस्टॉलेशन कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने डॉ. अमित अग्रवाल सहित अन्य फैकल्टी सदस्यों को निर्देश दिए कि मशीन का रुका हुआ काम जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि गंभीर कैंसर मरीजों को समय पर इसका लाभ मिल सके।
पेट-सीटी जांच शुरू होने से मरीजों को मिली बड़ी राहत
अस्पताल में पीपीपी मोड पर स्थापित पेट-सीटी मशीन से अब मरीजों को नियमित जांच की सुविधा मिलने लगी है। निरीक्षण के दौरान अधिष्ठाता डॉ. धाकड़ ने पेट-सीटी के कंसोल रूम में पहुंचकर जांच की पूरी प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया और चल रही जांच के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह बेहद संतोष की बात है कि अब ग्वालियर-चंबल के मरीजों को पेट-सीटी जांच के लिए महंगे निजी सेंटरों में अतिरिक्त शुल्क नहीं चुकाना पड़ेगा और न ही इसके लिए दिल्ली जैसे महानगरों के चक्कर काटने पड़ेंगे। स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक और उच्चस्तरीय जांच सुविधा मिलने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है। निरीक्षण के दौरान इंजीनियर कमल शर्मा, उपेंद्र राणा सहित संबंधित विभागों के चिकित्सक, इंजीनियर और अन्य कर्मचारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।





