सागर, मध्य प्रदेश31अक्टूबर2025। भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक कार्रवाई में, विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, जिला सागर, ने आय से अधिक अनुपातहीन संपत्ति रखने के आरोपी तत्कालीन सहायक समिति प्रबंधक अशोक कुमार दुबे को दोषी ठहराते हुए कठोर दण्ड सुनाया है।
31 अक्टूबर 2025 को पारित अपने निर्णय में, माननीय न्यायालय ने आरोपी अशोक कुमार दुबे को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) (ई) (आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखना) और 13(2) (आपराधिक अवचार) के तहत दोषी करार दिया।
क्या था मामला?
मामला आरोपी अशोक कुमार दुबे, जो बेरखेड़ी सड़क, तहसील राहतगढ़ में सहायक समिति प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे, के विरुद्ध प्राप्त एक अज्ञात शिकायत से शुरू हुआ था। गोपनीय सत्यापन में यह पाया गया कि आरोपी ने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित कर रखी है।
विवेचना के दौरान, माननीय न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त कर आरोपी के पैतृक मकान (ग्राम बसारी, गढ़ाकोटा) और सागर स्थित राजीव नगर मकान की तलाशी ली गई।
जांच और दस्तावेजों के गहन विश्लेषण के बाद यह प्रमाणित हुआ कि आरोपी ने अपनी पदस्थापना के दौरान (चैक पीरियड में) कुल ₹97,60,092 की आय अर्जित की, जबकि इसी अवधि में उसका कुल व्यय ₹1,66,66,026 पाया गया। इस प्रकार, आरोपी के पास ₹69,05,934 की अनुपातहीन संपत्ति होना सिद्ध हुआ।
न्यायालय का सख्त फैसला:
मामले की पूरी विवेचना और साक्ष्य संकलन के उपरांत अभियोग पत्र विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सागर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। विचारण (ट्रायल) के बाद, न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए निम्न सज़ा सुनाई:
- सज़ा: 05 वर्ष का सश्रम कारावास।
- अर्थदंड: ₹70,00,000/- (सत्तर लाख रुपए)।
यह निर्णय लोक सेवकों के बीच भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखने और जनता के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।





