ग्वालियर, 24 अक्टूबर 2026: जिले के करहिया थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते एक युवक पर चाकू से जानलेवा हमला करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने रंजिश का बदला लेने के लिए सुनसान जंगल में ले जाकर युवक के गले पर ताबड़तोड़ वार किए थे। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त चाकू, मोटरसाइकिल और घटना के समय पहने गए कपड़े जप्त कर लिए हैं।
जंगल में ले जाकर दिया था वारदात को अंजाम फरियादी मनीष रावत ने करहिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 18 अक्टूबर 2026 की रात करीब नौ बजे विक्की गौड़ उनके पुत्र निशांत रावत को घर से बुलाकर चितरहा वाले हनुमान मंदिर के जंगल में ले गया। वहां आरोपी ने निशांत से उसके भाई प्रशांत को समझाने की बात कही। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए विरोध करने पर निशांत के गले पर चाकू से चार-से-पाँच बार वार कर दिए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया। इस मामले में पुलिस ने अपराध क्रमांक 93/26, धारा 118(1), 296(बी), 351(3) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।
मुखबिर की सूचना पर नहर की पुलिया से पकड़ाया आरोपी थाना प्रभारी करहिया अंकिता भार्गव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। पुलिस टीम आरोपी की तलाश में ग्राम रिठोदन पहुंची, जहां घर और गांव में सुराग न मिलने पर मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी अंकित उर्फ विक्की गौड़ खेड़ा की नहर की पुलिया के पास भागने की फिराक में खड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को दबोच लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम अंकित उर्फ विक्की गौड़ (पुत्र भरत गौड़, उम्र 19 वर्ष, निवासी ग्राम रिठोदन) बताया।
पड़ोसी से झगड़े का बदला लेने के लिए किया था हमला पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसका पड़ोसी प्रशांत रावत से पूर्व में झगड़ा हुआ था, जिसका बदला लेने के लिए उसने उसके भाई निशांत पर चाकू से हमला किया था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त चाकू घटनास्थल के पास के जंगल से, तथा मोटरसाइकिल और घटना के वक्त पहने गए कपड़े उसके घर से बरामद कर लिए। मामले में धारा 109(1) बीएनएस का इजाफा कर आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया है।
सराहनीय भूमिका इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा करने और आरोपी को पकड़ने में थाना प्रभारी करहिया अंकिता भार्गव, उपनिरीक्षक गंगासिंह गुर्जर, प्रधान आरक्षक हरिमोहन शर्मा, आरक्षक जैनेन्द्र गुर्जर, रविशंकर सिंह राजावत, धर्मेन्द्र गुर्जर, दिनेश यादव, रामगोपाल गुर्जर और शिवम प्रताप सिंह की अहम भूमिका रही।





